एलोवेरा की खेती
आदि के बारे में जानकारी देते है.
आज हम जानकारी दे रहे है एलोवेरा की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के बारे में.
एलोवेरा जिसे ग्वारपाटा के नाम से जाना जाता है. इसका उपयोग प्राचिन समय से ही किया जा रहा है. एलोवेरा में अनेकों बीमारियों को ठीक करने का गुण पाया जाता है. इसलिए इसकी मांग दिनों दिन बढ़ती जा रही है
इस खेती के लिए कुछ जानकारियां का होना जरूरी हैं, तभी आप इसकी खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में एलोवेरा के प्रोडक्ट की संख्या तेजी से बढ़ी है। कॉस्मेटिक, ब्यूटी प्रोडक्ट्स से लेकर खाने-पीने के हर्बल प्रोडक्ट और अब तो टेक्सटाइल इंडस्ट्री में भी इसकी डिमांड होने लगी है।
दिन प्रतिदिन बढ़ते डिमांड को देखते हुए एलोवेरा की खेती करना काफी प्राॅफिटेबल है।
इस खेती के लिए कुछ जानकारियां का होना जरूरी हैं, तभी आप इसकी खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं।
सबसे पहले जानते है एलोवेरा की खेती के लिए मिट्टी कैसी होनी चाहिए.
एलोवेरा की खेती अनउपजाउ भुमि में भी की जा सकती है. लेकिन बलुई दोमट मिट्टी में इसका अधिक उत्पादन होता है।
लेकिन जिन इलाकों में अधिक पाला पड़ता हो वहां इसकी खेती नहीं करनी चाहिए.
एलोवेरा की खेती के लिए खेत की तैयारी ठीक से करने के लिए 10 या 12 टन गोबर प्रति हेक्टेयर डाले.
और रासायनिक उर्वरक में 120 किलो युरिया,.. 150 किलो फास्फोरस,.. और 33 किलो पोटाश का छिड़काव करें.
अब बात आती है पौधों की रोपाई की
पौधे की रोपाई आप साल भर में किसी भी समय कर सकते हैं, लेकिन बेहतर होगा कि जुन-जुलाई माह के दौरान ही पौधों की रोपाई की जानी चाहिए.
रोपाई के समय एक लाइन से दूसरे लाइन की दुरी 50 सेंटिमीटर और एक पौधे से दूसरे पौधे की दुरी 50 सेंटिमीटर होनी चाहिए.
इस तरह से पौधों की रोपाई करने पर 1 हेक्टयर भूमि में 10 हजार पौधों की जरूरत होती है.
पौधे की लम्बाई 10 से 15 सेमी होने पर कटाई करनी चाहिए.
सिंचाई के लिए ड्रिप एंव स्प्रिंकलर प्रणाली ठीक रहता है साल भर में 3 से 4 बार सिंचाई की जरूरत होती है.
और बेहतर होगा की गर्मी के दिनों में 20 से 25 दिनों के अंतराल में सिंचाई करें.
एलोवेरा की खेती के दौरान इस बात का ध्यान रखें की पौधे के सामने पानी जमा ना हो.

एलोवेरा की यदि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की जाएं तो किसानों के लिए फायदेमंद होता है।
एलोवेरा का सबसे अधिक इस्तेमाल हेल्थकेयर, कॉस्मेटिक, टेक्सटाइल और हर्बल दवा बनाने वाली कंपनियों में होता है
हर्बल दवा बनाने वाली कंपनियां जैसे पतंजलि, डाबर, बैद्यनाथ आदि कंपनियां से कॉन्ट्रैक्ट करके एलोवेरा की पत्तियां और पल्प सीधे बेच सकते हैं।
रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियां भी किसानों से सीधे पल्प और पत्तियां खरीदती हैं
इसके अलावा एलोवेरा की प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर भी आप अच्छी कमाई कर सकते हैं.
एलोवेरा की पत्तियों की तुलना में पल्प निकालकर बेचे पर 4 से 5 गुना ज्यादा मुनाफा होता है
यदि आप एलोवेरा की प्रोसेसिंग यूनिट लगाना चाहते हैं तो अपने जिले में थ्ब्ब्प् से लाइसेंस लेकर शुरु कर सकते हैं
प्रोसेसिंग यूनिट शुरू करने से पहले इसकी ट्रेनिंग जरूर ले लें.
इसकी ट्रेनिंग केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पांैधा संस्थान यानी सीमैप द्वारा दी जाती है।
ट्रेनिंग के लिए आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन होता है और निर्धारित फीस के बाद ये ट्रेनिंग ली जा सकती है।
मुझे उम्मीद है आपको लेख पसंद आई होगी. इसे लाईक करें और अपने दोस्तों को शेयर करें.
ग्रामीण बिजनेस, खेती, रोजगार आदि से संबंधित कोई जानकारी चाहते है तो कमेंट बाॅक्स में लिखें.
0 टिप्पणियाँ